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ब्लॉग्स (12)
भारत की तकरीबन 70 प्रतिशत आबादी गाँवों में रहती है और पक्की सड़कों के अभाव में अक्सर आवागमन तथा सामान ढोने के लिए मुख्य रूप से क्ष्रेत्र में उपलब्ध पालतू पशु जैसे बैलगाड़ी, खच्चर, भैंस तथा ऊँट पर निर्भर रहती है। भारत के सीमावर्ती रेतीले इलाकों में ऐसे बहुत ... आगे पढ़ें...

भारत का ह्रदय प्रदेश और बाघों के लिए प्रसिद्ध मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा भी मिला है पर बाघों के संरक्षण में लगातार पिछड़ते इस प्रदेश पर नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की भृकुटी तन गई है। हाल ही में प्राप्त सूचना के अनुसार केंद्रीय सरकार ने ... आगे पढ़ें...

बंगाल की खाड़ी के मुहाने पर स्थित 7,900 वर्ग मील क्षेत्रफल में फैला सुंदरबन मैंग्रोव पारिस्थितितंत्र दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र तथा भारत और बांग्लादेश का एकमात्र मैंग्रोव जंगल है जहाँ आज भी बाघ (टाइगर) अपनी दहाड़ से अपने अस्तित्व का परिचय देते यहाँ स्वछंद विचरण करते हैं। दुरूह दलदली में फैले और 'बाघादेव' द्वारा संरक्षित सुंदरबन के बारे में भारत तथा बांग्लादेश में बहुत चर्चा नहीं है पर इतना तो पता चल ही चुका है कि सुंदरबन के इस रक्षक को अब कम होते क्षेत्र, घटते शिकार और शिकारियों के कारण भारी नुकसान हो रहा है। इसी तरह प्राकृतिक आपदाओं व मनुष्य की गतिविधियों से बाघों की शरणस्थली मैंग्रोव जंगल भी अब तेजी से खत्म होते जा रहे हैं। आगे पढ़ें...

बहुत जल्द ही टाइगर यानी बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु बाघ का शिकार गधे, बंदर, बकरी और चूहा मिलकर करेंगे। जी हां, बाघ से राष्ट्रीय पशु का खिताब छिनने जा रहा है और उसके सिंहासन पर कब्जे के लिए गधे, बंदर, बकरी और चूहे के बीच जंग की तैयारी है। राष्ट्रीय पशु बाघ की ... आगे पढ़ें...

गजानन गणपति का स्वरूप, भारत में पूज्य माने जाने वाले गजराज को अपने अस्तित्व के लिए आजकल एक नई लड़ाई लड़नी पड़ रही है। कभी भारत हाथियों का स्वर्ग हुआ करता था, लेकिन शिकार, घटते जंगल और आहार में कमी के कारण इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। हर साल बड़ी ... आगे पढ़ें...

सुलताना तब सिर्फ कुछ महीने की ही रही होगी, जब उसे उसके परिवार से अलग कर मदारियों के हाथों बेच दिया गया और इसके बाद शुरू हुई सुलताना की तकलीफों की कहानी। उस छोटी-सी भालू की बच्ची की नाक को गर्म कील से छेदा गया और वहाँ से मुँह तक एक मोटी सी रस्सी बाँध दी ... आगे पढ़ें...

बिगड़ते पर्यावरण से अस्त-व्यस्त होते पारिस्तिथी तंत्र से आने वाले सालो में भीषण परिणाम देखने को मिलेंगें। विश्व की वन्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली स्विट्जरलैंड के एक संस्था इंटरनेशनल यूनियन फोर द कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IEUSN) ने वन्य प्राणियों ... आगे पढ़ें...

यह बड़ी दुखद बात है कि भारत के अलग-अलग चिड़ियाघरों और वन-उद्यानों के कई सिंहों को मरने के लिए छोड़ दिया गया है। यह समस्या अफ्रीकी और एशियाई प्रजाति के सिंहों के मेल से पैदा हुए संकर प्रजाति के सिंह हैं और इनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है और इनके जीन में कई ऐसी ... आगे पढ़ें...

प्रकृति ने हर प्राणी को एक नियम के तहत बनाया गया है, हर प्राणी को एक नियत जिम्मेवारी दी गई है, प्रकृति के इस चक्र में साफ-सफाई का काम करने वाले गिद्दों की संख्या पिछले एक दशकों में एकाएक घट गई है, लगभग सम्पूर्ण दक्षिण एशिया में विलुप्त हो रहे गिद्धों को ... आगे पढ़ें...

यह बात निःसंकोच रूप से स्वीकारी जाती है कि सन्‌ 1912 के जंगली जानवरों और पक्षियों के संरक्षण संबंधी कानून (The Wild Birds and Animals Protection act of 1912) के कारण तथा अंग्रेजी शासन के राजाओं के सहयोग से जंगली जानवरों और अनेक मूल्यवान पक्षियों को ... आगे पढ़ें...

वन्य जीवों के विनाश और लोप होने के अनेक कारण हैं। उनमें से एक मुख्य कारण है मनुष्यों की तेजी से बढ़ती संख्या। बढ़ती जनसंख्या की विषम समस्याओं को समझने के लिए यदि हम अपने ही देश की जनसंख्या संबंधी समस्याओं पर विचार करें, तो इस समस्या के भावी रूप को अच्छी तरह समझ सकते हैं। आगे पढ़ें...

मानव समाज और वन्य जीवों का पारस्परिक संबंध क्या है? यदि वन्य जीव भूमंडल पर न रहें, तो पर्यावरण पर तथा मनुष्य के आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा? तेजी से बढ़ती हुई आबादी की प्रतिक्रिया वन्य जीवों पर क्या हो सकती है आदि प्रश्न गहन चिंतन और अध्ययन के हैं। आगे पढ़ें...