रूबरू (10)
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इन्दौर में पला-बढा, मालवा की मिट्टी की मिठास (या यों कहें चटोरापन) लिए आपसे मुख़ातिब हूँ...घूमना-फिरना मेरी फितरत में शामिल है, ठेठ स्थानीय स्वाद चखने को कहीं भी कभी भी जाने को तैयार रहता हूँ। |
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SAVE TIGER (8)
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अक्सर नेशनल ज्यॉग्रफी चैनल पर एक विज्ञापन आता है उसमें बडे ही सरल तरीके से बाघ और बैंगन का रिश्ता समझाया जाता है, सभी को पता है कि धरती पर जीवन के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, और लगातार कटते जंगलों की वजह से वर्षा नही होती और जंगल इस वजह से कटते है की जंगल में बाघ नही आखिर बाघ के डर से कोई भी जंगल जाने से कतराता है। जब बाघ ही नही होंगे तो कोई डर नही होगा और जंगल क़ट जाएंगें और जंगल नही होंगे तो वर्षा नही होगी और बिन पानी बैंगन तो उगने से रहा |
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सलाम जिंदगी (5)
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जिंदगी एक सफर है जिस पर हर किसी को चलना है, दु:ख-सुख जीवन के दो रास्ते है| विषम परिस्थितियों के बावजूद जीवन के सफर में कई ऐसी भी शख्सियतें है जिन्होने मील के पत्थर स्थापित किए है और ऐसे पड़ाव डाले है जो आने वाले पथिकों को सम्बल प्रदान कर उन्हें आगे बढने को प्रेरित करतें है| |
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कच्चा-चिठ्ठा (8)
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अब यह तो थोड़ा मुश्किल .. अब आगे कुछ लिखा जाएगा| अपनी तारीफ करना भी तो मुश्किल है!! |
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इंदौर मेरी जान (3)
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हर किसी को अपना शहर, गाँव, कस्बा या कहें तो अपनी जन्मस्थली सबसे ज्यादा पसन्द होती है और मै भी इसका अपवाद नहीं.. मगर मेरे इंदौर की बात ही निराली है... शब-ए-मालवा.. सुबह-सुबह गर्मा-गरम पोहे-जलेबी... नागौरी की शिकंजी.. चटपटे कचौरी-समोसे, सेंव-नमकीन और देर शाम से ढलती रात तक राजवाड़ा चौक और सराफा की चौपाटी... लाईफ एकदम मस्त है यहाँ |
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दुनिया मेरी आँखो ... (7)
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कहा जाता है ‘परम पिता परमेश्वर ने जब सृष्टि की रचना की तब सबसे ज्यादा सुंदरता भारत को दी, ऊँचे पहाड़, घने वन, सुन्दर रेगिस्तान, रेतीले तट... प्रकृति के सारे नजारे.. चाहे सारी दुनिया घूम ली जाए मगर जो खूबसूरती यहाँ है वो कहीं नहीं.. मै खुशकिस्मत हूँ कि इनमें से कुछ नजारे देख पाया, कुछ जगह जा कर वहाँ की स्थानीय संस्कृति जी पाया। |
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