 किसी भी देश के लिए आतंक का सबसे भयानक चेहरा माने जाते हैं फिदायीन यानी आत्मघाती हमलावर। इन फिदायीन हमलावरों को एक लक्ष्य दिया जाता है, जिसे पूरा करने के लिए फिदायीन अपनी जान दे देते हैं। यह सबसे बड़ा सवाल है कि एक आम आदमी आखिर कैसे जिहाद के नाम पर इतनी ... आगे पढ़ें...
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मेहराज दुबेपलानिअप्पन चिदम्बरम का चेहरा हममें से ज़्यादातर के लिए वित्त मंत्रालय का पर्याय बन गया है। उन्हें गृह मंत्रालय में देखकर भी बहुत-से लोगों को सिर्फ पैसे की याद आएगी। नए मंत्रालय में उनके सामने नई चुनौतियां हैं... उनसे निपटने के लिए उनके पास नए ... आगे पढ़ें...
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 मुंबई हमले के बाद उपजे जनाक्रोश से बचने और डेमेज कंट्रोल की नीति के तहत केंद्र सरकार ने आखिर शिवराज पाटिल से भारत पर एहसान करवा ही दिया, एक पाटिल ने जैसे-तैसे इस्तीफा दे कहा अब मैं बड़ी राहत महसूस कर रहा हूँ, तो दूसरे पाटिल ने भी लगभग उसी तर्ज पर मानो ... आगे पढ़ें...
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मुंबई हमले के बाद एक बार फिर यह सवाल हमेशा की तरह मुँह बाए खड़ा है कि आखिर जिस तरह का हमला मुंबई में हुआ है, उसकी तैयारी एक-दो दिन में या एक-दो सप्ताह में भी नहीं हो सकती। जिस पैमाने पर जितने आधुनिक और शक्तिशाली हथियारों से मुंबई को निशाना बनाया गया है ... आगे पढ़ें...
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मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी और हमेशा सुर्खियों मे रहने वाले शब-ए-मालवा के लिए मशहूर होलकरकालीन शहर इंदौर में विधानसभा टिकटों को लेकर लम्बे समय से चल रही राजनैतिक रस्साकशी का पहला दौर समाप्त हो गया। जैसे ही आज दोपहर भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों ... आगे पढ़ें...
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 विश्व की कई सभ्यताओं द्वारा पूजे जाने वाले चंद्रदेव के पैर पखारने की तैयारी भारत ने काफी पहले से शुरू कर दी थी। 22 अक्टूबर 2008 का दिन न केवल इसरो के लिए मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि भारतीय इतिहास में भी सुनहरे हर्फों में लिखा जाएगा। इस दिन सुबह 6.22 ... आगे पढ़ें...
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 क्या तुम मुझसे पूछते हो कि मैं इस विश्व की उत्पत्ति और मानव की उत्पत्ति की व्याख्या कैसे करता हूँ? ठीक है, मैं तुम्हें बतलाता हूँ। चार्ल्स डारविन ने इस विषय पर कुछ प्रकाश डालने की कोशिश की है। उसको पढ़ो। सोहन स्वामी की ‘सहज ज्ञान पढ़ो। तुम्हें इस सवाल का ... आगे पढ़ें...
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 मित्रों, भगतसिंह के विचार बड़े ही क्रांतिकारी तथा अलग से थे| पिछले अंक में मिलें प्रतिसादों से स्पष्ट होता है की उनके विचारो में आज भी हम लोगों को झकझोरने की ताकत है तो जरा सोचिए जब उन्होने बहरे कानों को सुनाने के लिए धमाका किया होगा तो कभी अंधेरा न देखने ... आगे पढ़ें...
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 अमर शहीद भगत सिंह का जन्म एक सिख परिवार में हुआ जो आर्यसमाज में आस्था रखता था| कच्ची उम्र में ही भगत भारत के स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े थे| क्रांतिकारी विचारधारा के| शहीद भगत सिंह ने अपने आखरी दिनों में जेल में समय का सदुपयोग करते हुए ईश्वर तथा ... आगे पढ़ें...
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 बीतते समय के साथ आतंकवाद भी नित नए तरीके और तकनीकें अपनाता जा रहा है। जिस गति से तकनीकों व प्रौद्योगिकी का विकास हो रहा है, आतंकवादी भी इनका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। अब तक आपने हाईटेक, सायबर और छद्म आतंकवाद के बारे में सुना होगा, पर इन सबसे कहीं बढ़कर ... आगे पढ़ें...
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 सुलताना तब सिर्फ कुछ महीने की ही रही होगी, जब उसे उसके परिवार से अलग कर मदारियों के हाथों बेच दिया गया और इसके बाद शुरू हुई सुलताना की तकलीफों की कहानी। उस छोटी-सी भालू की बच्ची की नाक को गर्म कील से छेदा गया और वहाँ से मुँह तक एक मोटी सी रस्सी बाँध दी ... आगे पढ़ें...
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 कारगिल युद्ध में सेना की सर्वोच्च परंपरा का पालन करते शहीद हुए 2 राजपूताना राइफल्स के कैप्टन विजयंत थापर ने शहादत के ठीक पहले अपने परिजनों को एक पत्र लिखा था। इस पत्र को पढ़कर कोई भी यह समझ सकता है कि लड़ाई के मोर्चे पर भारतीय सैनिकों के हौसले कितने बुलंद ... आगे पढ़ें...
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 ‘हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।(या तो तू युद्ध में बलिदान देकर स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयश्री प्राप्त कर पृथ्वी का राज्य भोगेगा।) गीता के इसी श्लोक को प्रेरणा मानकर भारत के शूरवीरों ने कारगिल युद्ध में दुश्मन को पाँव पीछे ... आगे पढ़ें...
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 रूस-जार्जिया संघर्ष यूरेशिया में अमेरिकी और नाटो के बढते प्रभाव से फैले तनाव की परिणिती है। गत सप्ताह गुरूवार को जॉर्जिया द्वारा दक्षिण ओसेतिया के अलगाववादियों को दबाने के लिए सैनिक भेजने से हुई। इसके बाद रूस ने इसके खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई शुरू कर ... आगे पढ़ें...
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