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जुलाई 2009


ब्लॉग्स (2)
विश्व की कई सभ्यताएँ प्राचीनकाल से नागों को पूजती आई हैं। भारत में भी साँपों को आदिकाल से ही पूजनीय माना जाता रहा है, पर यही प्रथा आज इनके नाश का एक कारण बन गई है। भारत में नागों के नाम पर एक विशेष पर्व 'नागपंचमी' मनाया जाता है, इस त्यौहार में पूजे जाने वाले नागों की आज इतनी बदतर स्थिति है कि उन्हें खतरे में पड़ी प्रजाति के तौर पर चिन्हित किया गया है। आगे पढ़ें...

बंगाल की खाड़ी के मुहाने पर स्थित 7,900 वर्ग मील क्षेत्रफल में फैला सुंदरबन मैंग्रोव पारिस्थितितंत्र दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र तथा भारत और बांग्लादेश का एकमात्र मैंग्रोव जंगल है जहाँ आज भी बाघ (टाइगर) अपनी दहाड़ से अपने अस्तित्व का परिचय देते यहाँ स्वछंद विचरण करते हैं। दुरूह दलदली में फैले और 'बाघादेव' द्वारा संरक्षित सुंदरबन के बारे में भारत तथा बांग्लादेश में बहुत चर्चा नहीं है पर इतना तो पता चल ही चुका है कि सुंदरबन के इस रक्षक को अब कम होते क्षेत्र, घटते शिकार और शिकारियों के कारण भारी नुकसान हो रहा है। इसी तरह प्राकृतिक आपदाओं व मनुष्य की गतिविधियों से बाघों की शरणस्थली मैंग्रोव जंगल भी अब तेजी से खत्म होते जा रहे हैं। आगे पढ़ें...