चाहे वो क्रिकेट हो या कोई और खेल, दुनियाभर में हमेशा से खेल और खिलाड़ी अमन और चैन का संदेश देते आए है। पर दहशतदर्द हमेशा से ही प्रसिद्धी पाने के लिए अमनपसंदो पर निशाना साधते हैं। आतंकी इसके पहले भी इस्लामाबाद मेरियट होटल में ठहरे क्रिकेट खिलाड़ियों पर निशाना साध चुका है।
अफगानिस्तान में भी तालिबान सरकार अपने 'शासन' के दौरान सभी खेलों पर पाबन्दी लगा दी थी। तालिबान शासन के पहले काबुल और हेलमंद के लोग हर सुबह मैदानों पर फुटबॉल खेलते नजर आते थे पर 1996 में सत्ता में आते ही तालिबानों ने इसे 'शरियत के ऊसूलों' के खिलाफ बताते हुए आम लोगों पर किसी भी प्रकार के खेल खेलने पर पाबंदी लगा दी थी।
पहले से ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा 18 फरवरी 09 को तालिबान के साथ स्वात घाटी और आसपास के इलाकों में शरीयत लागू करने के सिलसिले में हुए 'निजाम ए अद्ल' को लागू करने से आतंकवादी संगठनों को पुनर्संगठित होने का मौका मिल जाएगा।
पाकिस्तान के बड़े भूभाग पर तालिबान की मौजूदगी है। अफगानिस्तान की सीमा से लगे देश के कबीलाई इलाके में खुद को सीमित करने के बाद तालिबान ने पेशावर और स्वात घाटी जैसे इलाकों में भी अपना प्रभाव बढ़ाया है। कबीलाई क्षेत्र से ही वे अफगानिस्तान में अमेरिका नीत गठबंधन सेना पर हमले करते हैं।
पिछले साल लाहौर के अल हमरा थिएटर के बाहर विश्व कला महोत्सव के दौरान हुए विस्फोटों तथा इस साल जनवरी में हुए कराची के दो डांस थिएटरों में हुए बम विस्फोटों के बाद तफ्तीश में पाकिस्तान सीआईडी की विशेष शाखा ने सिंध सरकार और सूबे के पुलिस प्रमुख को सौंपी एक रिपोर्ट में कराची में तालिबान की मौजूदगी को रेखांकित किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है तालिबान के पास हथियार और गोला-बारूद का भारी भंडार है और वह शहर को कभी भी बंधक बना सकता है। इसमें तालिबान के गुप्त अड्डों और सोहराब गोठ तथा कायदाबाद जैसे इलाकों में उनकी मौजूदगी का जिक्र किया गया है। पुलिस रिपोर्ट मे स्पष्ट तौर पर कहा है कि इन इलाकों में छोटे होटलों में रहने के अलावा तालिबान मंगोपिर और ओरंगी कस्बे तथा कम आय वर्ग वाले इलाकों और स्लम में छिपे हुए हैं।
एक पाकिस्तानी अखबार में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान का उपप्रमुख हसन महमूद कराची में छिपा हुआ है। इसी तरह की रिपोर्ट लाहौर के बारे में भी आई थी। मनावां हमले के पहले भी खुफिया रिपोर्ट में अंदेशा जताया गया था कि क्रिकेट खिलाड़ियों के हमलावर लाहौर में ही छुपे है और कभी भी कोई वारदात कर सकते हैं|
भारतीय सीमा से महज 12 किमी हुआ यह हमला भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को बहुत गंभीरता से लेना होगा| हाल की में कश्मीर के कुपवाड़ा और गुरेज सेना और आतंकियों में हुई भयंकर मुठभेडे इस बात का इशारा करती है कि अबा तालिबान और इस्लामिक आतंकी आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस चुके है|
भारत के लिए पाकिस्तान अब तक एक प्रकार से अघोषित रक्षापंक्ति रही है अगर तालिबान कभी पाकिस्तान में सत्त पर हावी हो गया तो भारत की प्रथम रक्षा पंक्ति ध्वस्त हो जाएगी। तालिबान उस स्थिति में अवश्य ही भारत की लोकतांत्रिक मान्यताओं और धर्मनिर्पेक्ष मूल्यों पर हमला करने के लिए उठ खड़ा होगा जो उनकी सोच से मेल नहीं खाते।
इस हमले से एक बात तो साफ हो गई है कि पाक राष्ट्रपति जरदारी की आतंकवाद को संवाद और विकास के जरिये खत्म करने की नीति लगता है पाकिस्तान को बरबाद करने में अब कोई कसर नही छोड़ेगी।
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