जल की जो मात्रा उपभोग और अन्य प्रयोगों के लिए उपलब्ध है, वह नदियों, झीलों और भूजल में उपलब्ध मात्रा का छोटा-सा हिस्सा है। भारत की अधिकांश कृषि, मानसून पर निर्भर है और जल के सही संचयन और पर्याप्त सिचांई के अभाव में प्रतिवर्ष हमारी खेती को नुकसान होता है और हमारे देश का किसान कभी पनप ही नहीं पाता है।
जंगलों के कटने और पर्यावरण को होती क्षति से देश में कहीं बाढ़ आ जाती है तो कहीं सूखा पड़ जाता है, कहीं पानी प्रदूषित है तो कहीं भूजल की कमी है। देश में पानी एक समान उपलब्ध नहीं है जिसके कारण देश के किसानों को सिचांई और शहरों में भी लोगों को जीवन-यापन करने में कठिनाई आती है।
इसके लिए हमें अपने रोजमर्रा के जीवन में जल सरंक्षण के उपाय काम में लाने चाहिए, इसके तहत हमें जितना हो सके पानी बचाना चाहिए। पानी का अपव्यय करना कानूनन अपराध घोषित करना चाहिए तथा सभी लोगों को जल सरंक्षण के बारे में शिक्षित करना चाहिए।
हमें पीने का पानी भी उतना ही लेना चाहिए जितनी जरूरत है, आधे गिलास पानी से अगर प्यास बुझ जाए तो हम आधा गिलास पानी भी बचा सकेंगे। कहावत है की बूँद-बूँद से सागर भी भरा जा सकता है।
ब्रश करते समय नल खुला न छोड़े तथा नहाते समय बालटी से नहाएँ, कपड़े धोने के बाद उसके पानी को साफ-सफाई के काम में लिया जा सकता है। लीक होते नलों को ठीक करने से तथा वर्षा के जल को संग्रह करेने तथा ऐसी कई छोटी-छोटी बातों का पालन करने से हम ज्यादा नहीं तो अपनी आवश्यकता अनुसार जल तो बचा ही सकेंगे।
उदाहरण के रूप में राजस्थान के अलवर जिले में जल सरंक्षण के लिए कार्य करने वाले और मेगसैसे पुरस्कार पाने वाले राजेन्द्र सिंह ने पूरे जिले में वर्षा का पानी सहेजने के लिए छोटे-छोटे तालाबों का निर्माण कर पूरे जिले को जल-संकट से मुक्त्ति दिला दी है।
इसके अलावा हमें उपलब्ध जल स्रोतो को साफ भी रखना होगा हाँलाकि भूजल में नमक की मात्रा ज्यादा होती हैं और स्वाद में भी खारा होता है,लेकिन इससे कहीं ज्यादा खतरनाक बात यह है कि इसमें काफी मात्रा में कीटनाशक मिले होते हैं। ये वे कीटनाशक है जिन्हें खेती में इस्तेमाल करते हैं। जमीन में गहराई तक इन कीटनाशकों के अंश पहुंचने से इनसे दूषित पानी हमारे शरीर में पहुंच रहा है।
इसके अलावा जल के स्रोतों के दूषित होने का एक बड़ा कारण औद्योगिक ईकाईयों से निकलने वाला कूड़ा-कचरा भी है। और जो पानी हम तक पहुंच रहा है, वह भी बीमारियों को न्यौता देने वाले कीटाणुओं से युक्त है। परिणाम यह है कि दूषित पेयजल के कारण डायरिया, आंत्रशोथ, चर्म रोग, पोलियो, हेपेटाइटिस, कैंसर जैसी बीमारियाँ बढ़ रही है और हर साल लाखों लोग का अपना शिकार बना रही है।
लोड हो रहा है...
प्रतिक्रियाएँ