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अगस्त 2008


ब्लॉग्स (8)
सुलताना तब सिर्फ कुछ महीने की ही रही होगी, जब उसे उसके परिवार से अलग कर मदारियों के हाथों बेच दिया गया और इसके बाद शुरू हुई सुलताना की तकलीफों की कहानी। उस छोटी-सी भालू की बच्ची की नाक को गर्म कील से छेदा गया और वहाँ से मुँह तक एक मोटी सी रस्सी बाँध दी ... आगे पढ़ें...

कारगिल युद्ध में सेना की सर्वोच्‍च परंपरा का पालन करते शहीद हुए 2 राजपूताना राइफल्स के कैप्टन विजयंत थापर ने शहादत के ठीक पहले अपने परिजनों को एक पत्र लिखा था। इस पत्र को पढ़कर कोई भी यह समझ सकता है कि लड़ाई के मोर्चे पर भारतीय सैनिकों के हौसले कितने बुलंद ... आगे पढ़ें...

‘हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्‌।(या तो तू युद्ध में बलिदान देकर स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयश्री प्राप्त कर पृथ्वी का राज्य भोगेगा।) गीता के इसी श्लोक को प्रेरणा मानकर भारत के शूरवीरों ने कारगिल युद्ध में दुश्मन को पाँव पीछे ... आगे पढ़ें...